My poems...

 *सलाह*

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सलाह देने सब आ जाते हैं

मुसीबत में हाथ बंटाने कोई नहीं आता।।


सलाह की जरूरत न भी हो,

तो भी हर कोई रुचि दिखाता।।


खुद की सोंच कैसी भी हो,

सलाह देकर स्वयं को गुणी बताता।।


स्वयं दुर्गुणों से दूर हूं,

यह ढ़ोंग पूरी दुनिया को दिखाता।।


असली हीरा कौन है

यह तो वक्त ही बताता।।


सलाह की फेहरिस्त कम न होगी

शब्दकोष भी कम पर जाएंगे

पड़ जाओ किसी मुसीबत में

तो लोग बखूबी पीठ दिखाएंगे

पीठ पीछे करनी हो बुराइयां

तो लंबी-चौड़ी कहानी सुनाएंगे।।


सलाह का क्या है

आज यहां कल किसी और पर

अदब दिखाएंगे।।


मुफ्त में सलाह देने वालों

किसी के अंदर की तकलीफों को

महसूस नहीं कर सकते

क्या आप अपना मुंह बंद

नहीं रख सकते।।


स्वरचित एवं मौलिक

प्रियंका प्रिया

पटना बिहार।।

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